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ब्लॉकचेन के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा। ब्लॉकचेन उन टेक्नोलॉजी में से एक है जो कि 21 वीं सदी कि अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। बढ़ते वक्त के साथ- साथ लोगों में ब्लॉकचेन के बारे में जानने की जागरुकता भी बढ़ती जा रही है। आज दुनिया भर में बहुत से संस्थान हैं जहां ब्लॉकचेन का प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि ये एक डिजिटल तरीका है, लेकिन फिर भी ब्लॉकचेन बहुत ही सिक्योर है। क्योंकि इस पर साइबर क्राइम होने के भी चांसेस बहुत कम होते हैं।  तो यहां हम आपको एक सरल भाषा में बताएंगे कि ब्लॉकचेन की सारी डिटेल । 

क्या है ब्लॉकचेन ? (Kya Hai Blockchain)

ब्लॉकचेन एक डिजिटल सिस्टम है । ये एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसे फाइनेंशियल ट्रांजिक्शन रिकॉर्ड करने के लिए बनाया गया है। जैसे अगर आप ऑनलाइन कुछ खरीददारी करते हैं तो उसके लेन- देन के लिए आपको थर्ड पार्टी की भी जरुरत होती है। जैसे- बैंक, पेटीएम, पेपल, मनी ट्रांसफर वगैरह- वगैरह। आप इनके जरिए भी ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में ट्रांजेक्शन करने के लिए आपको किसी भी थर्ड पार्टी की आवश्कता नहीं पड़ती। यहां आप बेचने और खरीदने वाले के बीच सीधे- सीधे लेनदेन की प्रक्रिया होती है। यही वजह है कि यहां ट्रांजेक्शन करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है। और अगर लगता भी है तो बहुत कम। साथ ही साथ ब्लॉकचेन तकनिकी में किये गये ट्रांजेक्‍शन में समय भी बहुत कम लगता है।

ब्लॉकचेन को आप एक Distributed Database मान सकते हैं। यानी कि ये एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क की तरह काम करता है। यह डिजिटल जानकारियों को वितरित करने की क्षमता रखता है। ये जानकारियां एक- दो कंप्यूटर्स पर नहीं बल्कि हजारों- लाखों कंप्यूटर्स पर मौजूद होते हैं। ब्लॉक चैन का हर एक कंप्यूटर हर एक रिकॉर्ड की पूरी हिस्ट्री की डिटेल रखता है। यह डेटाबेस एन्क्रिप्टेड है और गोपनीय तरीके से दर्ज किया गया है। इसमें लगातार कई रिकॉर्डस को compared किया जाता है, जिन्हें ब्लॉक कहते हैं जिसमे प्रत्येक ब्लॉक अपने से पहले ब्लॉक से लिंक रहता है। इसे पब्लिक लेजर भी कहते हैं।

ब्लॉकचेन की शुरुआत साल 2008-09 में बिटकॉइन टेक्‍नोलॉजी के जरिए की गई थी। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी बेहद जटिल है। इसे हैक करना काफी मुश्किल है । साइबर क्राइम और हैकिंग को रोकने के लिए ब्‍लॉकचेन तकनीक को फुलप्रूफ सिस्‍टम के तौर पर जाना जाता है। इसे हैक करने के लिए सभी हजारों कंप्यूटर में एक साथ साइबर अटैक करना होगा जो की नामुमकिन है। यही कारण है कि हम Blockchain को एक सुरक्षित टेक्नोलॉजी मानते हैं। भारत मैं हैकिंग रोकने और साइबर सिक्‍योरिटरी को बढ़ावा देने के लिए ब्‍लॉकचेन तकनीक लागू करने वाला आंध्र प्रदेश पहला राज्‍य है। कोई भी अपना ब्लॉक चेन अकाउंट https://blockchain.info/ वेबसाइट पर बना सकता है। ब्लॉकचैन फाल्ट टोलेरंट(fault Tolerant) भी है यानि इस सिस्टम में यदि एक कंप्यूटर खराब भी हो जाता है तो यह सिस्टम काम करता रहता है। इसमें कोई भी नए समझौते या रिकार्ड्स को दर्ज करना होता है तो इस के लिए कई साझेदारों (कम्प्यूटर्स) की स्वीकृति की जरुरत पड़ती है।

कैसे काम करती है ब्लॉकचेन की टेक्नोलॉजी ( Kaise Kaam Karti Hai Blockchain Ki Technology)

क्योंकि बिटकॉइन के जरिए ही सबसे पहले ब्लॉकचेन की शुरुआत की गई थी, तो आइए हम आपको बिटकॉइन तकनीक के जरिए ही बताते हैं कि कैसे काम करता है ब्लॉकचेन। बिटकॉइन इंटरनेट पर ऑनलाइन लेनदेन करने के लिए दोनों पक्षों के बीच तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बजाय क्रिप्टोग्राफिक (Cryptography) प्रमाण‍िकरण टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। यहां हर एक लेनदेन में एक डिजिटल सिग्नेचर की जरुरत होती है और यह पूरी तरह सुरक्षित है। प्रत्येक लेनदेन में Sender के Private Key का उपयोग करके डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित यानी कि Digitally Signed लेनदेन को Receiver के Public Key पर भेजा जाता है। Cryptocurrency के मालिक को Private Key  पर स्वामित्व को साबित करने की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसके बाद ही वह पैसे खर्च कर सकता है।

अब मान लीजिए कि कोई दो लोग A और B इंटरनेट पर काम करना चाहते हैं।

इन दोनों के पास एक Private Key है और एक Public Key

जैसा कि आपको हमने पहले भी बताया कि इस टेक्नोलॉजी में प्राइवेट और पब्लिक key का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल लेन- देन करना है। Private और Public Keys के संयोजन को एक बेहद उपयोगी डिजिटल हस्ताक्षर बनाने के लिए सहमति के रूप में देखा जा सकता है। इसके बदले में यह डिजिटल हस्ताक्षर स्वामित्व का मजबूत नियंत्रण प्रदान करता है।

डिजिटल ट्रांजेक्शन को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ इतना ही करना सही नहीं है। इसके बाद डिजिटल करंसी प्राप्त करने वाली इकाई डिजिटल हस्ताक्षर की पुष्टि करती है, इस प्रकार Sender की Public Key का उपयोग लेन-देन  में करके ही Private Key के Ownership को दर्शाता है। हर एक लेन-देन बिटकॉइन नेटवर्क में हर नोड के लिए प्रसारित किया जाता है और फिर सत्यापन के बाद एक सार्वजनिक बहीखाता में दर्ज किया जाता है। सार्वजनिक बहिखाता में दर्ज होने से पहले वैधता के लिए हर एक लेनदेन को सत्यापित होना जरूरी होता है। 

जब cryptographic keys को नेटवर्क के साथ जोड़ दिया जाता है, तो डिजिटल इंटरैक्शन का एक सुपर उपयोगी फॉर्म निकलता है।  बिटकॉइन के मामले में, इस प्रक्रिया की शुरुआत A की Private Key लेने की घोषणा करने से शुरू होती है, कि आप Cryptocurrency भेज रहे हैं और इसे B की Public Key के साथ जोड़े।

प्रोटोकॉल

एक ब्लॉक में एक डिजिटल सिग्नेचर, टाइमस्टैम्प और relevant information होते हैं,  तब नेटवर्क में सभी नोड्स पर इसे प्रसारित किया जाता है।

नेटवर्किंंग सर्विसिंग प्रोटोकॉल

Bitcoins और उसके सबसे छोटे यूनिट सतोशी को हासिल करने के लिए नेटवर्किंग करने वाले नोड्स की जरुरत होती है। साथ ही साथ बिटकॉइन के लेन- देन की पूरी जानकारी बनाने और maintain रखने की प्रक्रिया proof of work जैसे mathematical problems को हल करने के लिए होती है।

वे मूल रूप से अपनी CPU power के साथ वोट देते हैं। नए ब्लॉकों के बारे में अपना समझौता व्यक्त करते हैं या अवैध ब्लॉक को reject करते हैं। जब ज्यादातर miners एक ही solution पर आते हैं, तो वे chain के लिए एक नया ब्लॉक जोड़ते हैं। यह ब्लॉक टाइमस्टैम्प है, और इसमें डेटा या मैसेज भी हो सकते हैं।

यहां एक ब्लॉक की चैन है

हर एक ब्लॉकचैन के लिए Type, Amount और Verification अलग-अलग हो सकते हैं।  यह ब्लॉकचेन के प्रोटोकॉल का मामला है या नियम क्या है और एक वैध लेनदेन नहीं है, या फिर नये ब्लॉक का वैध निर्माण नहीं है। कोई भी rules और incentives तब बनाए जा सकते हैं जब पर्याप्त नोड्स इस बात की सहमति पर पहुंचें कि लेन-देन कैसे सत्यापित किया जाना चाहिए।

इस पूरी प्रक्रिया को आप नीचे दिए गए तस्वीर के जरिए भी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

Blockchain peer to peer टेक्नोलॉजी पर काम करता है। जिससे यूजर को फास्ट,

सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से इंटरनेट की करेंसी को ट्रांसफर करने में मदद मिलती है।

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