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बिटकॉइन इलेक्ट्रॉनिक रूप से तैयार की गई एक डिजिटल करेंसी है। हाल ही कुछ दिनों में बिटकॉइन की बढती मांग और लोकप्रियता ने पूरी दुनियां का ध्यान आकर्षित किया है। जिस तरह एडवांस टेक्नोलॉजी के माध्यम से पेपल और पेटीएम से हम ऑनलाइन पेमेंट ट्रांजैक्सन करते हैं उसी तरह आज क्रिप्टो करेंसी भी बहुत ही लोकप्रिय हो रही है इसकी खास वजह बिटकॉइन ही है। बिटकॉइन दुनियां की पहली ऐसी करेंसी है जिसे दुनियां की अन्य मुद्राएँ जैसे रूपये या डॉलर आदि की तरह प्रिंट नहीं किया जा सकता है और जो किसी बैंकिंग सिस्टम से कण्ट्रोल नहीं है। यही कारण है कि बिटकॉइन में ट्रांजैक्सन करने पर आपको कोई फीस नहीं देनी पड़ती है। कुछ देशों में इसे काफी महत्व दिया जा रहा है तो कुछ देशों में इस पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वर्तमान संदेहात्मक स्थिति कई सवाल पैदा करती है जैसे कि बिटकॉइन का आधार क्या है? आइये गहराई से जानते हैं बिटकॉइन के बारे में –

बिटकॉइन का आधार

परंपरागत मुद्राएँ सोने या चाँदी पर आधारित होती हैं लेकिन बिटकॉइन के मामले ऐसा नहीं है। यह एक ऐसी मुद्रा है जिसे न प्रिंट किया जा सकता है न कण्ट्रोल किया जा सकता है। इसीलिए इसके आधार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। चर्चित डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन की सप्लाई सीमित है इसे 21 मिलियन तक ही जारी किया जा सकता है और इस आंकड़े को साल 2140 तक पूरा होने की सम्भावना है। इसकी तय सीमा यह निश्चित करती है कि बिटकॉइन मैथमेटिक्स पर आधारित है। दुनिया भर में सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का उपयोग करके बिटकॉइन को प्रोडयूस करने के लिए मैथमेटिकल फॉर्मूला का पालन करना होता है। यह फॉर्मूला स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है,। अभी तक केवल 16.7 मिलियन बिटकॉइन ही जारी हो पाए हैं।

कैसे बनता है बिटकॉइन

बिटकॉइन “क्रिप्टो करेंसी” कॉन्‍सेप्‍ट का पहला क्रियान्वन है,  जिसे साल 1998 में वेई दाई द्वारा साइबरपंक्स मेलिंग लिस्ट पर पहली बार डिस्क्राइब किया गया था। साल 2009 में सातोशी नाकामोतो के क्रिप्टोग्राफी मेलिंग लिस्‍ट में पहले बिटकॉइन का स्पेसिफिकेशन और प्रूफ मिला था। लेकिन उन्‍होने अपने बारें में ज्‍यादा कुछ बाताए बिना ही छोड़ दिया। बिटकॉइन को प्रतियोगी और विकेंद्रीकरण प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है यही प्रक्रिया माईनिंग कही जाती है। माईनिंग प्राक्रिया के दौरान कंप्यूटरों का एक ग्लोबल नेटवर्क सॉफ्टवेर के इस्तेमाल से मैथमेटिक्स के जटिल एल्गोरिथम को सोल्व करने के कोशिश करते हैं।

कैसे होता है माइनिंग का काम

किसी विशेष हार्डवेयर के साथ सॉफ़्टवेयर को रन करके कोई भी बिटकॉइन माइनिंग कर सकता है। विशेष हार्डवेयर पर रन होने वाला माइनिंग सॉफ्टवेयर पीयर-टू-पीयर नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित ट्रांजैक्‍शन को देखता है और इन लेनदेन की प्रक्रिया की पुष्टि करने के लिए उपयुक्त कार्य करता है। बिटकॉइन माइनर्स इसके लिए फीस लेते हैं, जो एक फिक्‍स फार्मूला पर आधारित होती हैं। साल भर तैयार होने वाले बिटकॉइन समय के साथ ऑटोमेटिकली आधे हो जाते हैं, यह तब तक चलता रहेगा जब तक 21 मिलियन बिटकॉइन जारी नहीं हो जाते।

बिटकॉइन की कीमत

बिटकॉइन की कीमत का निर्धारण वर्तमान निश्चित वॉल्यूम के अनुसार आपूर्ति और मांग के आधार पर किया जाता है। दुनियां भर में जैसे ही बिटकॉइन की मांग बढती है इसकी कीमत में उछाल आने लगता है और जैसे ही आपूर्ति होती है या मांग कम होती है तो इसकी कीमत नीचे गिर जाती है। अभी हाल के कुछ सालों के अन्दर इसकी कीमत में भारी उछाल आया है।

           


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