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क्रिप्टोकरेंसी जितनी तेजी से मार्केट में फैल चुका है, उसे देखते हुए हम ये तो कह ही सकते हैं कि आने वाला समय क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के बेहतर साबित हो सकता है। अगर आप भी क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर रहे हैं या चाहते हैं क्रिप्टोकरेंसी में अपने पैसे लगाना तो यहां बहुत सारी चीजें हैं, जो आपको जानना जरूरी है। हालांकि क्रिप्टकरेंसी एक डिजिटल फॉर्म है करेंसी का, यानी कि यहां सारी चीजें टेक्नीकल है तो आपको यहां बहुत से Technical चीजों को भी समझना होगा। यहां बहुत से ऐसे technical Words होंगे, जिसका पता आपको होना चाहिए। तो आपकी इन्हीं परेशानी को दूर करेंगे हम, क्योंकि हम आपको अपने इस प्लेटफॉर्म में बताते हैं उन हर बारीकियों के बारे में जो आप जानना चाहते हैं। ये तो आपको मालूम ही होगा कि बिटकॉइन सबसे पहला क्रिप्टोकरेंसी है। वहीं आपने बिटकॉइन के split होने की बात भी जरूर सुनी होगी। आपने ये भी सुना होगा कि बिटकॉइन का hard fork किया गया है, लेकिन बहुत ही कम लोगों को ये मालूम है कि आखिर ये hard fork होता क्या है। तो आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में Hard Fork के बारे में ही बताने जा रहे हैं, कि आखिर क्या है hard fork और क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में क्यों पड़ती है इसकी जरूरत।

किसे कहते हैं Hard Fork (Kise Kehte Hain Hard Fork)

बिटकॉइन हो या फिर इथेरियम, आपने इन क्रिप्टोकरेंसी के spilt होने के बारे में सुना है। जरूरत पड़ने पर इन क्रिप्टोकरेंसी को दो भागों में बांट दिया गया । किसी भी क्रिप्टोकरेंसी को दो भागों में बांटने को टेक्नीकल लैंग्वेज में fork कहते हैं। जैसे बिटकॉइन के transaction की स्पीड में कमी और भी बहुत सी प्रॉब्लमस को देखते हुए बिटकॉइन को दो भागों में बांटा गया। इनके Software को Update किया गया, इसे ही हम Forking  कहते हैं। Forking भी दो तरह की होती है Hard Fork और Soft Fork.

किसी भी क्रिप्टोकरेंसी को इन्हीं तरीकों से बांटा जा सकता है। जैसे कि बिटकॉइन और इथेरियम का Hard Fork किया गया।   Hard Fork तब किया जाता है जब एक ब्लॉकचेन दो अलग- अलग बेमेल चेन में बंटते हैं। बेमेल यानी कि अलग हुए ब्लॉकचेन में समानता नहीं होती। इनके ब्लॉक साइज अलग होते हैं, इनकी लिमिट अलग होती है बगैरह- बगैरह। जैसे बिटकॉइन का जब Hard Fork किया गया तो उसका जो दूसरा version है बिटकॉइन कैश, उसके ब्लॉकचेन की लिमिट बढ़ गई।

क्यों पड़ती है Hard Fork की जरुरत (Kyu hoti hai Hard Fork ki Jarurat)

Hard Fork इसलिए किया जाता है ताकि आपके क्रिप्टोकरेंसी में आ रही परेशानियों को दूर किया जा सके।  क्रिप्टोकरेंसी बहुत तरह की होती है, हर एक क्रिप्टोकरेंसी की अपनी एक ब्लॉकचेन होती है। उस ब्लॉकचेन में बहुत सारे ब्लॉक होते हैं। जिसमेंं आपकी पूरा transaction history, आपकी पूरी डिटेल save रहती है। पूरे ब्लॉकचेन में बहुत सारे limitation हैं जो hard fork के जरिए दूर कर दिए गए हैं। hard fork का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर के पुराने संस्करणों में पाए जाने वाले important security risks को दूर करने, नए function को add करने और transaction के reverse के लिए किया जाता है। किसी भी क्रिप्टोकरेंसी के Hard fork होने पर ये जरूरी होता है कि आप भी उसे Upgarde करें, वरना आपके Transaction invalid हो जाते हैं। जैसा कि इथेरियम के Hard Fork के वक्त देखने को मिला। Hard Fork का रिलेशन ब्लॉकचेन से होता है। इसमें ब्लॉकचेन का permanent diversion हो जाता है पहले version के ब्लॉकचेन से। यह जरूरी रुप से ब्लॉकचेन में एक fork बनाता है।

कैसे कर सकते हैं Hard Fork  (How are Hard Forks Created )

किसी भी क्रिप्टोकरेंसी का segwit होना तभी संभव है जब उसे उसके users या फिर miners community का सपोर्ट मिले। जैसे बिटकॉइन को भी जब Split किया गया, तो उससे पहले उसके यूजर्स की राय ली गई। हालांकि जब भी किसी क्रिप्टोकरेंसी की forking की जाती है, तो उसके लिए दो ऑप्शन मौजूद होते हैं Soft Fork और Hard Fork. ऐसे में बिटकॉइन के करीब 90 percent यूजर्स ने इसके hard fork करने को लेकर अपनी वोटिंग की। जिसके बाद बिटकॉइन का hard fork किया गया। ऐसा ही दूसरे और क्रिप्टोकरेंसी के साथ भी हुआ। क्रिप्टोकरेंसी के forking के लिए यूजर्स की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी decentralized होते हैं। इनपर किसी भी सरकार, संस्थान या फिर बैंक का स्वामित्व नहीं होता है। ऐसे में इसमें होने वाले किसी भी बदलाव के लिए इसके यूजर्स और माइनर्स की ही जरुरत होती है। इसके यूजर्स ही तय करते हैं, जिसके बाद ही किसी क्रिप्टोकरेंसी का hard fork किया जा सकता है।


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